RPF Foundation Day: क्यों बनाई गई थी रेलवे सुरक्षा बल की जरूरत? 1957 के कानून से 1985 में सशस्त्र बल बनने तक जानिए पूरा इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे हर साल 20 सितंबर को रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF का स्थापना दिवस मनाता है। आज रेलवे की संपत्ति और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था में RPF की अहम भूमिका है, लेकिन इसकी मौजूदा व्यवस्था तक पहुंचने का इतिहास कई दशकों पुराना है। रेलवे में सुरक्षा की शुरुआत आजादी से पहले ‘वॉच एंड वार्ड’ व्यवस्था से हुई थी। रेलवे की संपत्ति, माल, गुड्स शेड, यार्ड और वैगन की सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों के बीच धीरे-धीरे एक संगठित और कानूनी रूप से मजबूत सुरक्षा बल की आवश्यकता महसूस की गई।

आजादी से पहले थी वॉच एंड वार्ड व्यवस्था

आजादी से पहले रेलवे की संपत्ति की निगरानी के लिए ‘वॉच एंड वार्ड’ व्यवस्था लागू थी। इसका मुख्य काम रेलवे के माल, गुड्स शेड, यार्ड, वैगन और दूसरी संपत्तियों की सुरक्षा करना था।

1872 में रेलवे पुलिस समिति ने सुझाव दिया था कि रेलवे पुलिस और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां अलग-अलग होनी चाहिए। इसके बाद 1921 में वॉच एंड वार्ड व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई गई। व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इसे एक वरिष्ठ अधिकारी के नियंत्रण में संगठित किया गया।

1950 के दशक में बढ़ी रेलवे की सुरक्षा की चुनौती

आजादी के बाद भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। रेलवे के जरिए माल की आवाजाही बढ़ने के साथ रेलवे की संपत्ति और माल की सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी। चोरी और माल के नुकसान से रेलवे को आर्थिक नुकसान होता था। इसके अलावा यात्रियों और कारोबारियों की ओर से किए जाने वाले मुआवजे के दावों का बोझ भी बढ़ रहा था।

इन्हीं समस्याओं को समझने और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 1950 के दशक की शुरुआत में कई अध्ययन किए गए। इनमें 1954 का मलिक अध्ययन रेलवे की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

RPF की स्थापना में IB की क्या भूमिका थी?

रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB के निदेशक के माध्यम से भी अध्ययन कराया गया था। इसका उद्देश्य रेलवे में चोरी और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं के कारणों को समझना और यह देखना था कि उस समय की वॉच एंड वार्ड व्यवस्था इन चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त है या नहीं।

अध्ययन के दौरान रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए ज्यादा संगठित व्यवस्था और स्पष्ट कानूनी अधिकारों की जरूरत सामने आई। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि IB ने सीधे RPF बनाने का आदेश दिया था। 1954 के मलिक अध्ययन ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और वॉच एंड वार्ड व्यवस्था को अधिक प्रभावी तथा कानूनी आधार देने की जरूरत को सामने रखा।

1957 में RPF Act से मिला कानूनी आधार

रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में 1957 में बड़ा कदम उठाया गया। इसी साल संसद ने रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 बनाया। इस कानून के जरिए रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक संगठित बल को कानूनी आधार मिला।

RPF की मुख्य जिम्मेदारी रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा करना और उससे जुड़े अपराधों को रोकने की व्यवस्था को मजबूत करना था। इसके साथ रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट कानूनी ढांचा मिला।

20 सितंबर 1985 को RPF बना सशस्त्र बल

समय के साथ रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका और अधिकारों में बदलाव किए गए। 20 सितंबर 1985 को कानून में संशोधन के बाद RPF को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा दिया गया। इस बदलाव के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में RPF की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई।

इस तरह रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था का सफर वॉच एंड वार्ड प्रणाली से शुरू होकर 1957 के RPF कानून और फिर 1985 में RPF को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा मिलने तक पहुंचा।

Related posts